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पार्किंसन (कंपनवात) के उपचार में फिजियोथेरेपी की भूमिका

  पार्किंसन क्या है? पार्किंसन एक दीर्घकालिक (क्रॉनिक) न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो सामान्यतः वृद्धावस्था (60 वर्ष से अधिक) में अधिक देखी जाती है। यह पुरुषों में अपेक्षाकृत अधिक होती है, लेकिन 40–50 वर्ष की आयु के लोगों में भी हो सकती है। कारण यह रोग मस्तिष्क के सब्सटैंशिया नाइग्रा (Substantia Nigra) नामक भाग की तंत्रिका कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त या नष्ट होने के कारण होता है। इसके परिणामस्वरूप मस्तिष्क में डोपामिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर की मात्रा कम हो जाती है। डोपामिन शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से पार्किंसन के लक्षण उत्पन्न होते हैं। डोपामिन क्या है? * डोपामिन को प्रेरणा (Motivation) और मानसिक एकाग्रता का हार्मोन कहा जाता है। यह ध्यान, एकाग्रता, प्रेरणा तथा अन्य मानसिक गतिविधियों को नियंत्रित करने में सहायता करता है। पार्किंसन रोग के मुख्य लक्षण :- * कंपकंपी (Tremor) हाथ, पैर, उंगलियाँ, गर्दन या जबड़े का अनियंत्रित रूप से हिलना। * मांसपेशियों में जकड़न (Rigidity) शरीर की मांसपेशियों का कठोर या कड़ा हो जाना। * गतियों का धीमा होना (Brad...